टुकड़े-टुकड़े गैंग नहीं, इन्हें 'लोकतंत्र का गिद्ध' कहिए
टुकड़े-टुकड़े गैंग नहीं, इन्हें 'लोकतंत्र का गिद्ध' कहिए
कट्टरपंथी मुसलमानों और जमातियों ने देश को भीषण संकट की ओर धकेल दिया है। लेकिन टुकड़े-टुकड़े गैंग कह रहा है कि मुसलमानों को जानबूझ कर बदनाम किया जा रहा है। वास्तव में इन्हें टुकड़े-टुकड़े गैंग नहीं, 'लोकतंत्र का गिद्ध' कहा जाना चाहिए
चायनीज वायरस दुनिया में अब तक एक लाख से अधिक लोगों की जिंदगी लील चुका है और करीब 20 लाख लोग इससे संक्रमित हैं। भारत में भी कोविड-19 से 240 मौतें हो चुकी हैं और करीब 7,500 लोग संक्रमित हैं। देश संकट में है और सरकार पूरी ताकत के साथ जानलेवा वायरस से लड़ रही है और वामपंथी, सेकुलर व कथित बुद्धिजीवी जमात ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विरुद्ध ही मुहिम छेड़ रखी है। यह गिरोह लगातार अफवाहें फैला रहा है कि मोदी सरकार ने वायरस से निपटने के लिए कोई तैयारी नहीं की। वह केवल थाली, ताली बजवा कर और मोमबत्ती जलवा कर लोगों को भ्रमित कर रही है। यह गिरोह भ्रम और अफवाह फैलाकर देश को आपात स्थिति में धकेलने का पूरा प्रयास कर रहा है ताकि चाइनीज वायरस के संक्रमण से ज्यादा से ज्यादा लोगों की मौत हो और वे इसका सारा दोष मोदी सरकार पर थोप सकें। यही लोग उन कट्टरपंथी मुसलमानों और तब्लीगी जमात की करतूतों पर परदा डालने में जुटे हैं, जिसने देश को नाजुक स्थिति में पहुंचा दिया है। अभी भी काफी संख्या में जमाती छिपे हुए हैं और संक्रमण फैला रहे हैं। जो अस्पताल में भर्ती किए गए हैं, वे डॉक्टरों-नर्सों के लिए सिरदर्द बने हुए हैं और मौका मिलते ही अस्पताल से भाग जा रहे हैं। लेकिन टुकड़े-टुकड़े गैंग कह रहा है कि साजिश के तहत जमातियों को बदनाम किया जा रहा है।
जमातियों के समर्थन में वामपंथी-सेकुलर
वामपंथी और सेकुलर तत्व कुतर्क कर रहे हैं कि दिल्ली के निजामुद्दीन में तब्लीगी जमात में शामिल छह लोगों की कोविड-19 से मौत के बाद मुसलमानों के खिलाफ फर्जी खबरों की बाढ़ आ गई है। कोरोना संक्रमण के फैलाव के लिए मुसलमानों को जिम्मेदार ठहराया जा रहा है। कारवां वेबसाइट ने तो कट्टरपंथी मुसलमानों को बाकायदा क्लीनचिट देते हुए एक खबर की है। इसमें बताया गया है कि मार्च मध्य से मुसलमानों पर फर्जी खबरों की बमबारी शुरू हुई है। वेबसाइट के मुताबिक, हाल तक कोविड-19 से जुड़ी अधिकांश फर्जी खबरें मजहब से जुड़ी नहीं थीं, लेकिन 30 मार्च के बाद से सोशल मीडिया पर इस्लामोफोबिक फर्जी खबरों में अचानक वृद्धि हुई है।
यह वही गिरोह है, जिसने अफवाह फैलाया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार की बजाए 'वायरस को मारने के लिए' लोगों से ताली-थाली बजवा रहे हैं, जबकि सच्चाई यह है कि उन्होंने महामारी से लड़ने में सबसे अगली पंक्ति में खड़े चिकित्सकों, नर्सों और अन्य स्वास्थ्यकर्मियों का आभार जताने के लिए देशवासियों से यह अपील की थी। कारण, कुछ लोगों द्वारा इनके खिलाफ सामाजिक भेदभाव और मनोवैज्ञानिक भय का माहौल बनाने की खबरें आ रही थीं। इसी तरह, 5 अप्रैल को ग्रिड फेल होने की अफवाह इसी टुकड़े-टुकड़े गैंग और इनके आका कांग्रेस ने अफवाह फैलाई, जबकि 9 मिनट तक दीया-टॉर्च जलाने का आह्वान इसलिए किया गया ताकि लोग सकारात्मक बने रहें। लॉकडाउन के फैसले पर यही गिरोह कह रहा था कि इतना बड़ा फैसला लेने से पहले प्रधानमंत्री को ठीक से सोच-विचार करना चाहिए था। प्रधानमंत्री ने 22 मार्च को जनता कर्फ्यू का आह्वान किया था, तब यही गिरोह शोर मचा रहा था कि एक दिन के बंद से क्या होगा?
विदेशी मीडिया का भी मिला साथ
24 मार्च को लॉकडाउन की घोषणा के बाद मीडिया का एक वर्ग और टुकड़े-टुकड़े गैंग यह कहकर लोगों में भय फैला रहे थे कि भारत में स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति अच्छी नहीं है। पूरा देश बंद कर मोदी सरकार अपनी जिम्मेदारियों से भाग रही है। सार्क देशों को 700 मिलियन डॉलर की मदद की घोषणा की बजाए मोदी को केरल सरकार की तरह देश के लिए राहत पैकेज की घोषणा करनी चाहिए। लेकिन वामपंथी और सेकुलर जमात यह भूल गया कि 20,000 करोड़ की राहत पैकेज की घोषणा करने वाले पिनराई विजयन को केंद्र सरकार से आर्थिक मदद मांगने की जरूरत क्यों पड़ गई?
उन्हें यह नहीं मालूम कि जनता कर्फ्यू लॉकडाउन की तैयारी का एक हिस्सा था। इनके साथ विदेशी मीडिया भी लॉकडाउन के फैसले को लेकर सरकार को कठघरे में खड़ा कर रहा था। वाशिंगटन पोस्ट ने इसे नाटकीय फैसला बताते हुए लिखा कि दुनिया के किसी देश, यहां तक कि चीन ने भी देशव्यापी बंद नहीं किया। लॉकडाउन के फैसले को हाहाकारी कदम बताते हुए इसने लिखा कि सब कुछ बंद होने के कारण बड़ी संख्या में लोग जहां-तहां फंस गए हैं। खासतौर से उत्तर प्रदेश पुलिस गरीबों को प्रताडि़त कर रही है। अगर भारत कोरोना वायरस पर नियंत्रण पाने में सफल भी हो गया तो इस बात की पूरी-पूरी संभावना है कि ‘देश की अर्थव्यवस्था कई माह पीछे चली जाएगी, जिसके कारण ‘बड़ी संख्या में आजीविका का संकट’ उत्पन्न होगा। इसने भारत सरकार के इस फैसले को कोविड-19 के विरुद्ध 'आखिरी हथियार' बताया था। वहीं, ब्लूमबर्ग भविष्यवाणी कर रहा था कि लचर आर्थिक और स्वास्थ्य सेवाओं से जूझता दक्षिण एशियाई देश भारत, कोरोना वायरस संक्रमण के मामले में अगला वैश्विक हॉटस्पॉट बन सकता है।
इधर, टुकड़े-टुकड़े गैंग भी वही बात दूसरे तरीके से कह रहा था कि ‘देखते जाइए आगे क्या होता है।’ वे नरेंद्र मोदी सरकार पर हमलावर थे और सांकेतिक रूप से बता रहे थे कि भारत में महामारी फैलने से कोई नहीं रोक सकता। लोगों की मौत की कामना करने वाले इसे गिरोह को टुकड़े-टुकड़े गैंग कहने की बजाए 'लोकतंत्र के गिद्ध' कहा जाना चाहिए। ये किसी भी सूरत में देश का भला चाहते ही नहीं। ये वो लोग हैं जो लोकतंत्र की दुहाई देकर अभिव्यक्ति की आजादी तो मांगते हैं, लेकिन उदाहरण उत्तर कोरिया का देते हैं कि उसने अपनी स्वास्थ्य सेवाओं में अभूतपूर्व सुधार लाकर कोरोना संक्रमण को फैलने से रोका। ऐसा दावा करने से पहले उन्हें कम से कम एक बार दक्षिण कोरिया में अमेरिकी सेना के वरिष्ठ कमांडर जनरल रॉबर्ट अबराम्स का वह साक्षात्कार भी देख लेना चाहिए जो उन्होंने संयुक्त रूप से सीएनएन और वॉइस ऑफ अमेरिका को दिया है।
सरकार के प्रयासों पर पानी फेरा
दरअसल, लॉकडाउन के बाद देसी मीडिया-विदेशी मीडिया और टुकड़-टुकड़े गैंग ने सुनियोजित तरीके से अफवाह फैलाना शुरू किया ताकि स्थिति बिगड़े। लॉकडाउन के तुरंत बाद ही सोशल मीडिया और मीडिया पर ऐसे वीडियो और खबरें परोसी जाने लगीं कि कोई स्कूटी से ही 1700 किलोमीटर दूर अपने घर पहुंचा तो कोई पैदल ही सैकड़ों किलोमीटर चल कर। इसी समय दिल्ली की आम आदमी पार्टी सरकार और उसके विधायक राघव चड्ढा ने जो किया, उसे तो पूरे देश ने देखा और पढ़ा। दूसरी तरफ, लॉकडाउन का उल्लंघन कर मुसलमान मस्जिदों में जुटते रहे और आज तक उनका यह सिलसिला नहीं थमा। इसी बीच, तब्लीगी जमात की करतूतें सामने आईं। अगर कट्टरपंथी मुसलमानों और टुकड़े-टुकड़े गैंग का रुख सकारात्मक होता, देश से प्रेम होता तो अब तक देश न केवल सुरक्षित होता, बल्कि दुनिया के लिए मिसाल पेश कर रहा होता। लेकिन तमाम साजिशों के बावजूद मोदी सरकार ने अभी तक जिस तरह से हालात को नियंत्रण में रखा है, दुनिया उसकी कायल है। मोदी ने उस समय तीन सप्ताह के लॉकडाउन का फैसला लिया जब अमेरिका, ब्रिटेन और यूरोप के विकसित देशों ने ऐसा कठोर कदम उठाना तो दूर, इसके बारे में सोचा तक नहीं था। नतीजा आज इन देशों की स्थिति दुनिया के सामने है।
स्वास्थ्य मंत्री ने बखिया उधेड़ी
शुरुआती दिनों में जब संक्रमित मरीजों की संख्या बढ़ने लगी तो टुकड़े-टुकड़े गैंग सोशल मीडिया पर दु्ष्प्रचार करने लगा कि 30 जनवरी को देश में कोरोना संक्रमण का पहला मामला आया। लेकिन सरकार हाथ पर हाथ धरे बैठी रही। चीनी वायरस से जब चीन सहित पूरी दुनिया त्रस्त थी, तब प्रधानमंत्री मोदी अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की मेहमाननवाजी में व्यस्त थे और पानी की तरह पैसे बहा रहा था। लेकिन वामपंथी ब्रिगेड के इस झूठ की बखिया केंद्रीय मंत्री डॉ. हर्षवर्धन ने 27 मार्च को एनडीटीवी पर प्रणय रॉय के एक कार्यक्रम में उधेड़ी। उन्होंने कहा, 'पिछले साल 31 दिसंबर को चीन ने पहली बार दुनिया को पहली बार अपने यहां निमोनिया के कुछ मामलों के बारे में बताया। उसके अनुसार, इसके कारण ज्ञात नहीं थे। इसके बाद 7 जनवरी को उसने विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) को बताया कि ये मामले नए कोरोना वायरस के कारण थे। 8 जनवरी से हमने इस मुद्दे पर विशेषज्ञों से तकनीकी विचार-विमर्श शुरू दिया था। ऐसा करने वाले हम दुनिया के पहले देश थे। 17 जनवरी को हमने इस पर विस्तृत प्रतिक्रिया तैयार कर सभी राज्यों को विस्तृत परामर्श जारी किया। अगले दिन यानी 18 जनवरी को हमने देश के 7 प्रमुख हवाई अड्डों पर कोविड-19 प्रभावित देशों से आने वाले यात्रियों के लिए थर्मल जांच की व्यवस्था शुरू कर दी। यहां तक कि डब्ल्यूएचओ ने काफी दिन बाद 30 जनवरी को अंतरराष्ट्रीय आपातकाल का ऐलान किया।' बता दें कि 30 जनवरी तक चीन में कोरोना वायरस के कहर से 212 लोगों की मौत हो चुकी थी।
वह आगे कहते हैं, 'भारत में कोरोना वायरस संक्रमण का पहला मामला जनवरी के अंत में आया था। उस समय से अब तक देश में कुछ हजार मामले ही सामने आए हैं। पूरी दुनिया के आंकड़ों के साथ इसकी तुलना कीजिए। अमेरिका, इंग्लैंड, फ्रांस, जर्मनी, स्पेन, चीन, कोरिया, इटली आदि विकसित देशों सहित दुनिया के दुनिया में 200 से अधिक देश इससे प्रभावित हैं। उनके यहां संक्रमण और वहां हो रही दुर्भाग्यपूर्ण मौतों की संख्या देखिए। भारत ने बहुत बेहतर ढंग से स्थिति को नियंत्रित किया है।'
साथ ही, लॉकडाउन का ठीक से पालन नहीं करने पर चिंता जताते हुए स्वास्थ्य मंत्री ने कहा, 'लॉकडाउन तीन हफ्ते का था। दो हफ्ते बीत चुके हैं। दो हफ्ते के बाद निश्चित रूप से हमारे लिए यह सोचने का विषय है कि हमें और क्या करना है? जिन लोगों ने लॉकडाउन की मर्यादा को, लॉकडाउन के दिशानिर्देशों को, लॉकडाउन की गंभीरता का इन दो हफ्तों में पूरी तरह सम्मान नहीं किया हो, उनके लिए यह अवसर है कि कम से कम अगले एक सप्ताह लॉकडाउन का मर्यादित तरीके से पालन करें। इसके लिए ज्यादा कुछ नहीं करना है। घर में रहना है और सोशल डिस्टेंसिंग बनाए रखनी है। कोशिश करें कि हमें बीमारी न लगे और हम अगर संभावित बीमारी से प्रभावित व्यक्ति हो सकते हैं तो किसी दूसरे को बीमारी न दें।'
टुकड़े-टुकड़े गैंग इतना धूर्त है कि हर बार उसका झूठ सामने आता है, लेकिन हर बार वह उतनी ही बेशर्मी से फिर अपने काम में जुट जाता है। लेकिन जब तक उसका झूठ पकड़ा जाता है, तब तक नुकसान हो जाता है। इसलिए यह समाज की भी जिम्मेदारी है कि वह सोशल मीडिया और मीडिया पर उनके द्वारा फैलाए जा रहे झूठ का पर्दाफाश करे
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चायनीज वायरस दुनिया में अब तक एक लाख से अधिक लोगों की जिंदगी लील चुका है और करीब 20 लाख लोग इससे संक्रमित हैं। भारत में भी कोविड-19 से 240 मौतें हो चुकी हैं और करीब 7,500 लोग संक्रमित हैं। देश संकट में है और सरकार पूरी ताकत के साथ जानलेवा वायरस से लड़ रही है और वामपंथी, सेकुलर व कथित बुद्धिजीवी जमात ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विरुद्ध ही मुहिम छेड़ रखी है। यह गिरोह लगातार अफवाहें फैला रहा है कि मोदी सरकार ने वायरस से निपटने के लिए कोई तैयारी नहीं की। वह केवल थाली, ताली बजवा कर और मोमबत्ती जलवा कर लोगों को भ्रमित कर रही है। यह गिरोह भ्रम और अफवाह फैलाकर देश को आपात स्थिति में धकेलने का पूरा प्रयास कर रहा है ताकि चाइनीज वायरस के संक्रमण से ज्यादा से ज्यादा लोगों की मौत हो और वे इसका सारा दोष मोदी सरकार पर थोप सकें। यही लोग उन कट्टरपंथी मुसलमानों और तब्लीगी जमात की करतूतों पर परदा डालने में जुटे हैं, जिसने देश को नाजुक स्थिति में पहुंचा दिया है। अभी भी काफी संख्या में जमाती छिपे हुए हैं और संक्रमण फैला रहे हैं। जो अस्पताल में भर्ती किए गए हैं, वे डॉक्टरों-नर्सों के लिए सिरदर्द बने हुए हैं और मौका मिलते ही अस्पताल से भाग जा रहे हैं। लेकिन टुकड़े-टुकड़े गैंग कह रहा है कि साजिश के तहत जमातियों को बदनाम किया जा रहा है।
जमातियों के समर्थन में वामपंथी-सेकुलर
वामपंथी और सेकुलर तत्व कुतर्क कर रहे हैं कि दिल्ली के निजामुद्दीन में तब्लीगी जमात में शामिल छह लोगों की कोविड-19 से मौत के बाद मुसलमानों के खिलाफ फर्जी खबरों की बाढ़ आ गई है। कोरोना संक्रमण के फैलाव के लिए मुसलमानों को जिम्मेदार ठहराया जा रहा है। कारवां वेबसाइट ने तो कट्टरपंथी मुसलमानों को बाकायदा क्लीनचिट देते हुए एक खबर की है। इसमें बताया गया है कि मार्च मध्य से मुसलमानों पर फर्जी खबरों की बमबारी शुरू हुई है। वेबसाइट के मुताबिक, हाल तक कोविड-19 से जुड़ी अधिकांश फर्जी खबरें मजहब से जुड़ी नहीं थीं, लेकिन 30 मार्च के बाद से सोशल मीडिया पर इस्लामोफोबिक फर्जी खबरों में अचानक वृद्धि हुई है।
यह वही गिरोह है, जिसने अफवाह फैलाया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार की बजाए 'वायरस को मारने के लिए' लोगों से ताली-थाली बजवा रहे हैं, जबकि सच्चाई यह है कि उन्होंने महामारी से लड़ने में सबसे अगली पंक्ति में खड़े चिकित्सकों, नर्सों और अन्य स्वास्थ्यकर्मियों का आभार जताने के लिए देशवासियों से यह अपील की थी। कारण, कुछ लोगों द्वारा इनके खिलाफ सामाजिक भेदभाव और मनोवैज्ञानिक भय का माहौल बनाने की खबरें आ रही थीं। इसी तरह, 5 अप्रैल को ग्रिड फेल होने की अफवाह इसी टुकड़े-टुकड़े गैंग और इनके आका कांग्रेस ने अफवाह फैलाई, जबकि 9 मिनट तक दीया-टॉर्च जलाने का आह्वान इसलिए किया गया ताकि लोग सकारात्मक बने रहें। लॉकडाउन के फैसले पर यही गिरोह कह रहा था कि इतना बड़ा फैसला लेने से पहले प्रधानमंत्री को ठीक से सोच-विचार करना चाहिए था। प्रधानमंत्री ने 22 मार्च को जनता कर्फ्यू का आह्वान किया था, तब यही गिरोह शोर मचा रहा था कि एक दिन के बंद से क्या होगा?
विदेशी मीडिया का भी मिला साथ
24 मार्च को लॉकडाउन की घोषणा के बाद मीडिया का एक वर्ग और टुकड़े-टुकड़े गैंग यह कहकर लोगों में भय फैला रहे थे कि भारत में स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति अच्छी नहीं है। पूरा देश बंद कर मोदी सरकार अपनी जिम्मेदारियों से भाग रही है। सार्क देशों को 700 मिलियन डॉलर की मदद की घोषणा की बजाए मोदी को केरल सरकार की तरह देश के लिए राहत पैकेज की घोषणा करनी चाहिए। लेकिन वामपंथी और सेकुलर जमात यह भूल गया कि 20,000 करोड़ की राहत पैकेज की घोषणा करने वाले पिनराई विजयन को केंद्र सरकार से आर्थिक मदद मांगने की जरूरत क्यों पड़ गई?
उन्हें यह नहीं मालूम कि जनता कर्फ्यू लॉकडाउन की तैयारी का एक हिस्सा था। इनके साथ विदेशी मीडिया भी लॉकडाउन के फैसले को लेकर सरकार को कठघरे में खड़ा कर रहा था। वाशिंगटन पोस्ट ने इसे नाटकीय फैसला बताते हुए लिखा कि दुनिया के किसी देश, यहां तक कि चीन ने भी देशव्यापी बंद नहीं किया। लॉकडाउन के फैसले को हाहाकारी कदम बताते हुए इसने लिखा कि सब कुछ बंद होने के कारण बड़ी संख्या में लोग जहां-तहां फंस गए हैं। खासतौर से उत्तर प्रदेश पुलिस गरीबों को प्रताडि़त कर रही है। अगर भारत कोरोना वायरस पर नियंत्रण पाने में सफल भी हो गया तो इस बात की पूरी-पूरी संभावना है कि ‘देश की अर्थव्यवस्था कई माह पीछे चली जाएगी, जिसके कारण ‘बड़ी संख्या में आजीविका का संकट’ उत्पन्न होगा। इसने भारत सरकार के इस फैसले को कोविड-19 के विरुद्ध 'आखिरी हथियार' बताया था। वहीं, ब्लूमबर्ग भविष्यवाणी कर रहा था कि लचर आर्थिक और स्वास्थ्य सेवाओं से जूझता दक्षिण एशियाई देश भारत, कोरोना वायरस संक्रमण के मामले में अगला वैश्विक हॉटस्पॉट बन सकता है।
इधर, टुकड़े-टुकड़े गैंग भी वही बात दूसरे तरीके से कह रहा था कि ‘देखते जाइए आगे क्या होता है।’ वे नरेंद्र मोदी सरकार पर हमलावर थे और सांकेतिक रूप से बता रहे थे कि भारत में महामारी फैलने से कोई नहीं रोक सकता। लोगों की मौत की कामना करने वाले इसे गिरोह को टुकड़े-टुकड़े गैंग कहने की बजाए 'लोकतंत्र के गिद्ध' कहा जाना चाहिए। ये किसी भी सूरत में देश का भला चाहते ही नहीं। ये वो लोग हैं जो लोकतंत्र की दुहाई देकर अभिव्यक्ति की आजादी तो मांगते हैं, लेकिन उदाहरण उत्तर कोरिया का देते हैं कि उसने अपनी स्वास्थ्य सेवाओं में अभूतपूर्व सुधार लाकर कोरोना संक्रमण को फैलने से रोका। ऐसा दावा करने से पहले उन्हें कम से कम एक बार दक्षिण कोरिया में अमेरिकी सेना के वरिष्ठ कमांडर जनरल रॉबर्ट अबराम्स का वह साक्षात्कार भी देख लेना चाहिए जो उन्होंने संयुक्त रूप से सीएनएन और वॉइस ऑफ अमेरिका को दिया है।
सरकार के प्रयासों पर पानी फेरा
दरअसल, लॉकडाउन के बाद देसी मीडिया-विदेशी मीडिया और टुकड़-टुकड़े गैंग ने सुनियोजित तरीके से अफवाह फैलाना शुरू किया ताकि स्थिति बिगड़े। लॉकडाउन के तुरंत बाद ही सोशल मीडिया और मीडिया पर ऐसे वीडियो और खबरें परोसी जाने लगीं कि कोई स्कूटी से ही 1700 किलोमीटर दूर अपने घर पहुंचा तो कोई पैदल ही सैकड़ों किलोमीटर चल कर। इसी समय दिल्ली की आम आदमी पार्टी सरकार और उसके विधायक राघव चड्ढा ने जो किया, उसे तो पूरे देश ने देखा और पढ़ा। दूसरी तरफ, लॉकडाउन का उल्लंघन कर मुसलमान मस्जिदों में जुटते रहे और आज तक उनका यह सिलसिला नहीं थमा। इसी बीच, तब्लीगी जमात की करतूतें सामने आईं। अगर कट्टरपंथी मुसलमानों और टुकड़े-टुकड़े गैंग का रुख सकारात्मक होता, देश से प्रेम होता तो अब तक देश न केवल सुरक्षित होता, बल्कि दुनिया के लिए मिसाल पेश कर रहा होता। लेकिन तमाम साजिशों के बावजूद मोदी सरकार ने अभी तक जिस तरह से हालात को नियंत्रण में रखा है, दुनिया उसकी कायल है। मोदी ने उस समय तीन सप्ताह के लॉकडाउन का फैसला लिया जब अमेरिका, ब्रिटेन और यूरोप के विकसित देशों ने ऐसा कठोर कदम उठाना तो दूर, इसके बारे में सोचा तक नहीं था। नतीजा आज इन देशों की स्थिति दुनिया के सामने है।
स्वास्थ्य मंत्री ने बखिया उधेड़ी
शुरुआती दिनों में जब संक्रमित मरीजों की संख्या बढ़ने लगी तो टुकड़े-टुकड़े गैंग सोशल मीडिया पर दु्ष्प्रचार करने लगा कि 30 जनवरी को देश में कोरोना संक्रमण का पहला मामला आया। लेकिन सरकार हाथ पर हाथ धरे बैठी रही। चीनी वायरस से जब चीन सहित पूरी दुनिया त्रस्त थी, तब प्रधानमंत्री मोदी अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की मेहमाननवाजी में व्यस्त थे और पानी की तरह पैसे बहा रहा था। लेकिन वामपंथी ब्रिगेड के इस झूठ की बखिया केंद्रीय मंत्री डॉ. हर्षवर्धन ने 27 मार्च को एनडीटीवी पर प्रणय रॉय के एक कार्यक्रम में उधेड़ी। उन्होंने कहा, 'पिछले साल 31 दिसंबर को चीन ने पहली बार दुनिया को पहली बार अपने यहां निमोनिया के कुछ मामलों के बारे में बताया। उसके अनुसार, इसके कारण ज्ञात नहीं थे। इसके बाद 7 जनवरी को उसने विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) को बताया कि ये मामले नए कोरोना वायरस के कारण थे। 8 जनवरी से हमने इस मुद्दे पर विशेषज्ञों से तकनीकी विचार-विमर्श शुरू दिया था। ऐसा करने वाले हम दुनिया के पहले देश थे। 17 जनवरी को हमने इस पर विस्तृत प्रतिक्रिया तैयार कर सभी राज्यों को विस्तृत परामर्श जारी किया। अगले दिन यानी 18 जनवरी को हमने देश के 7 प्रमुख हवाई अड्डों पर कोविड-19 प्रभावित देशों से आने वाले यात्रियों के लिए थर्मल जांच की व्यवस्था शुरू कर दी। यहां तक कि डब्ल्यूएचओ ने काफी दिन बाद 30 जनवरी को अंतरराष्ट्रीय आपातकाल का ऐलान किया।' बता दें कि 30 जनवरी तक चीन में कोरोना वायरस के कहर से 212 लोगों की मौत हो चुकी थी।
वह आगे कहते हैं, 'भारत में कोरोना वायरस संक्रमण का पहला मामला जनवरी के अंत में आया था। उस समय से अब तक देश में कुछ हजार मामले ही सामने आए हैं। पूरी दुनिया के आंकड़ों के साथ इसकी तुलना कीजिए। अमेरिका, इंग्लैंड, फ्रांस, जर्मनी, स्पेन, चीन, कोरिया, इटली आदि विकसित देशों सहित दुनिया के दुनिया में 200 से अधिक देश इससे प्रभावित हैं। उनके यहां संक्रमण और वहां हो रही दुर्भाग्यपूर्ण मौतों की संख्या देखिए। भारत ने बहुत बेहतर ढंग से स्थिति को नियंत्रित किया है।'
साथ ही, लॉकडाउन का ठीक से पालन नहीं करने पर चिंता जताते हुए स्वास्थ्य मंत्री ने कहा, 'लॉकडाउन तीन हफ्ते का था। दो हफ्ते बीत चुके हैं। दो हफ्ते के बाद निश्चित रूप से हमारे लिए यह सोचने का विषय है कि हमें और क्या करना है? जिन लोगों ने लॉकडाउन की मर्यादा को, लॉकडाउन के दिशानिर्देशों को, लॉकडाउन की गंभीरता का इन दो हफ्तों में पूरी तरह सम्मान नहीं किया हो, उनके लिए यह अवसर है कि कम से कम अगले एक सप्ताह लॉकडाउन का मर्यादित तरीके से पालन करें। इसके लिए ज्यादा कुछ नहीं करना है। घर में रहना है और सोशल डिस्टेंसिंग बनाए रखनी है। कोशिश करें कि हमें बीमारी न लगे और हम अगर संभावित बीमारी से प्रभावित व्यक्ति हो सकते हैं तो किसी दूसरे को बीमारी न दें।'
टुकड़े-टुकड़े गैंग इतना धूर्त है कि हर बार उसका झूठ सामने आता है, लेकिन हर बार वह उतनी ही बेशर्मी से फिर अपने काम में जुट जाता है। लेकिन जब तक उसका झूठ पकड़ा जाता है, तब तक नुकसान हो जाता है। इसलिए यह समाज की भी जिम्मेदारी है कि वह सोशल मीडिया और मीडिया पर उनके द्वारा फैलाए जा रहे झूठ का पर्दाफाश करे
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